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Khwaja Ke Tukdo Pe Palta Hai Hindustan
V.A
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Lyrics
Uploaded bypasserby
आज मेरे की जमीन पे देखा है नजारा, नेता हो चाहे सेखिया, आशिक हो तुम्हारा.
हिन्दू हो मुसल्मान हो या सिख या इसाई, मिलता है मिल रहा है वहाँ सबको सहारा.
केहता हे मिरे देश का बच्चा, बूडा और जबान,
केहता हे मिरे देश का बच्चा, भूडा और जबान.
पाजा के टुकडों पे में ही नहीं पलता है हिंदोस्तान।
कहता है मेरे देश का बच्चा बूडा और जवान।
कहता है मेरे देश का बच्चा बूडा और जवान।
कहता है मेरे देश का बच्चा बूडा और जवान।
कहता है मेरे देश का बच्चा बूडा और जवान।
कहता है मेरे देश का बच्चा बूडा और जवान।
कहता है दर्प सवाली में हूं महताज तुम्हारा।
खौजपिया दर्बार में तेरे निकले मेरी जान।
आजाते टुकडों पे में ही नहीं इक तू ही नहीं।
पलता है मेरे देश का बच्चा बूडा और जवान।
कहता है दर्बा और जवान।
आजाते टुकडों पे में ही नहीं इक तू ही नहीं इक तू ही नहीं।
हाँ आले नभी हो फाजा हो आप अताए रिसालते।
औलादे अली हेदर हो हाँ आला आपकी निस्बते।
हाँ आले नभी हो फाजा हो आप अताए रिसालते।
औलादे अली हेदर हो हाँ आला आपकी निस्बते।
ये देश मेरा महका है।
ये देश में ना महता है, आमद से खाजा तुम्हारे, कहते हैं भारत बासी, खाजा हो आप हमारे।
ये देश में ना महता है, आमद से खाजा तुम्हारे, कहते हैं भारत बासी, खाजा हो आप हमारे।
ये देश में ना महता है, आमद से खाजा तुम्हारे, कहते हैं भारत बासी, खाजा हो आप हमारे।
प्याला है ये खाजा का, जिसमें है आना सागर, खाजा के हाँच का खत्रा, लगता है जेसे समंदर।
इक खत्रा ता कर दीजे, प्याला मेरा भर दीजे।
या भाजा गरम हो जाए, दामन मेरा भर दीजे।
दामन कर पे खेलाते हैं, बड़े बड़े सुल्तान।
भाजा के टुकडों पे में ही नहीं, इक तु ही नहीं, पलता है हिंदुस्तान।
भाजा के टुकडों पे में ही नहीं, पलता है हिंदुस्तान।
जैपाल ने जाए, प्याला में ही नहीं, पलता है हिंदुस्तान।
जैपाल ने जाए, प्याला में ही नहीं, प्याला में ही नहीं, पलता है हिंदुस्तान।
जैपाल ने जाए, प्याला में ही नहीं, पलता है हिंदुस्तान।
जैपाल की ले आया इमान।
पाजा के टुखडों पे में ही नहीं, दिक्तू ही नहीं, पलता है हिंदुस्तान।
पाजा के टुखडों पे में ही नहीं, पलता हिंदुस्तान।
भारत में मेरे ख़ाजा का अजमेर में रोजा देखो और ख़ाजा जी के दर्पर हर रोज है मेला देखो
भारत में मेरे ख़ाजा का अजमेर में रोजा देखो और ख़ाजा जी के दर्पर हर रोज है मेला देखो
आठो पहर रोजे पर बरसात रहे रहमत की
आठो पहर रोजे पर बरसात रहे रहमत की
आठो पहर रोजे पर बरसात रहे रहमत की
आए किसमत उसकी फिर चमकी और जो भी दर्पन आए किसमत फिर उसकी चमकी
हाम तो आर हस्सान का कर दो पूरा हर अर्मान
पाजा के तुकडों पे में ही नहीं पलता है हिन्दुस्तान
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V.A
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