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San San Karta Naag Bhayankar
Mannu Tanwar
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Lyrics
Uploaded bypasserby
आईये प्रेमी सेज़नों ये रागणी आपके वीच्छ में रूप और बसंत के किस्ते की
बात उस समय की जब रूप को सरपने डस लिया तो बसंत अपने भाई को देखके रोने लग जाता है
क्योंकि दोनों भाई जंगल बिया बान में मोसी के दुबारा निकाले हुए अपना गुजारा कर रहे थे
और जैसे ही भाई को सरपने डचा और उसका सरीर नीला हो जाता है
तो बसंत की आखों से आशु जा रहे हैं यहां का हाल कभी ने वर्णन किया
सुनेगा देहाती रागणी एंडिजे के मादम से
गा रही हैं मन्नू तवर राजस्थान से
जिसमें बहुत अच्छा संगीत दिया है माश्टर हंसराज जी ने
धोलक पे हैं राजु गोला जी
बेंजो पे हैं भाई लोकेश जी पैड पे बजा रहे हैं
हमारे भाई हरीश और नंगारे पे संगत कर रहे हैं
भाई मुबारत जी आईए रागणी के मादम से सुनेगा
कविन के असल क्या लिखा है
एरसंसं करता नाग भयं करे
तड़े रे ब्रक्षी के आया
सोते हुए रे कबर के उपर
विश्च का ढंपे चलाया
संसं करता नाग भयं करे
तड़े रे ब्रक्षी के आया
सोते हुए रे कबर के उपर
विश्च का ढंपे चलाया
तेरे आँख खुली भड़ बड़ा रे उठा
विश्च का ढंपे चलाया
तेरे आँख खुली भड़ बड़ बड़ा रे उठा
विश्च का ढंपे चलाया
चाला कर गी चोट नागे की
सोता शिशु रे दबाया
सोते हुए रे कबर के उपर
विश्च का ढंपे चलाया
रूपी कबर बिला के बोला
बचा हाई मर गया माँ
भीर दा फाड़ बिलकती बाणी
विश्च रे गा कर गया माँ
कश्टी कराथी में तड़फे था
निली पढ़ेगी काया
सोते हुए रे कबर के उपर
विश्च का ढंपे चलाया
बेट किया वाज़ शुरग मैं
जननी सुनती होगी
सुरग लोक मैं बेबस होमा
चिरने धूनती होगी
गम के अकशर चुनती होगी
के इश्वर तेरी माया
सोते हुए रे कबर के उपर
विश्च का ढंपे चलाया
मुमे नीले जाग रूप के
उडगे प्रान पखेरो
सीतल हुया रे शरीर व्रेखश जन
मुरजा गया है समे रूप
रिशीर बाले को सिंदर ने मिले
गम का राग सुनाया
सोते हुए रे कबर के उपर
विश्च का ढंपे चलाया
सनसान करीता नागी भयां करे
तडे रे व्रेखशी के आया
सोते हुए रे कबर के उपर
विश्च का ढंपे चलाया
सोते हुए रे कबर के उपर
विश्च का ढंपे चलाया
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Artist
Mannu Tanwar
Uploaded byThe Orchard
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