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Ram Katha By Morari Bapu Mulund, Vol. 4, Pt. 1

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सब रुख जाते थे किन्तु का मतलव भोले बहु सुणदर छे पण शबरी ना बोर खादाय एवु तो क्याहि नथिती एएसे बોलते दे क्योकि श
एनी पासे रहे 20 वरस ती एनी साथे ना सबन चरि
एस स्तरी साथी बाजारु महिला सथरी
20 वरस ना सबन पचि एव्यक्ती नु लगन थयवु
एपरणी ने घरे आयो एनी पतनी घरे आवी
एनी मांग मा संदूर परआयो एक सवहागन सतरी छरि
अन एक कलाक पचि पुरूष्य ने रदईरोग नो हूमलो थयव ।
पुरूष्य नु मोत थयो
तवझमीन, जागीर, जाईदाज कबने मलश जे परणी ना आवी एने मलशू
अनिया तो एने मलव जे परणी जाए जरने परणी जरने
मारों तमारो इश्वर साथे सबण चे
पर पेली बाजारू महिला जयव सबण चे
20 वरस्ट नो शु गणानो तो साइट साइट वरस्ट नो जे पोय पत्तो लग्ग
और दुव का सबण्द मिरा का सबण्द
परणी गया जे हरी नी साथे इन बदू मरजाय जिस ने शादी करली हरी के
मै एसे बरको प्यो बरूं जो आज जीए कल मरजाय
सन्तो एतला माते जगतमा कयरे विध्वा नथी थया करण के परमातमा नी साथे परणी गया
सन्तो अखनड सवभय्य पराप्त करएजे
एतला माते कबीर सहब कहेजे
शुन्य मरे अजपा मरे अनहद हुं मरजाय
राम सने ही नाम रे कह कबीर संजाय
कहरी नाम जपीय अनि सथे परणी ने सबन चोडी ने
पछि कोई परसण ने
आपनो सबन जरूर छे बाजारू महिला जोपने
सकिकत छे नाम
मन्दीर मा दरशन करतो इने माणस
आखो बन्द करिने
पन्दर पईस आवीस पईसा
पचचिस पईसा नाखिने
पचचीस पत्टी
खटव सठव
कर्धकव
करनव
खटव गडव
करणव
घरनु सच्चव
सचचव
गडव
गडव
झडव
गडव
खटव
खटव
खटव
जटव
खटव
जटव
जटव
गडव
जता
सर्यो
तरतव
नाए
तरतव
सन्तन
पलू पनी पिगय, दूबय, इवी चिठ्ती आपी, हमें तरि गये जरा
जोईयेगे तो करा, चिठ्ती मा लख्युवशु?
चिठ्ती खोले, तो अंदर राम लख्यो
भोर काई आवी खबर हतत, आपने मोटा अक्षर लखिन पड़े
यह तो नना अक्षर लखी
तुल्सिदात जी ना अक्षर करता, आपना अक्षर सरस थयय
तुल्सि कहे छोड़ो ये बाब
निकल गये ना, बोले नहीं बाबा, भेद बताओ
बोले खोटू नहीं लागे न, कहे नहीं
बोले तमें पहली वखत तरिया
और बीजी वखत तनाया
एनु कारण पहली वखत जे राम थू
ये तुल्सि नु राम थू
और बीजी वखत जे राम थू
ये चोर नु राम थू, अटलो फरक
वात ये नहीं होई
अधिकार संपन्न थाए
प्यारे ये वात द्रट बनी
बजार मा हुन तमें बोली
कोईने कही हटी जाओ
तो लोगो आपने गाल देशे
तू हटाओ वाड़ो
पर पुलिस्मैन कहें थो
हटी जाओ, हटी जाओ
कानकि उसको अधिकार है
शास्त्र तो वोही के वोही है, शब्द वोही के वोही है
पहुँ पंडित है, तो सारी
अलंकारिक वाशा में शब्द उगो ठून रजू करे
कोई हसे तो, बाकि वात तो
यहनी एजे, एसिवाई
तो कई कहवानु, पर अधिकार पची
जे बोलाय
ये लोखन नो खिलो जैम
लाकणा मां धर्बाय जतो है
सजजड थय जाय
बादमे नहीं ले जाय
इश्वर नी साथे सबन जोडाय
अने हरी नाम लेवाय तो
अनते थहस
बिजु कई करवानु रहतो
कथा शुका
अतलू भार पुर्व कमे कईये करवान
रहम नाम थो पसी तमे कदा
जम कहओ के अमे तो सांबलिये पण तमे
काटो निकले एपन काडी नाकवानु
जेना द्वारा काड़वा मा वे पण फयकि देवानु
आप काटो काड़वा ना साधनो छे
अनते तो केवल हरी नाम जब बचेसे
बद्धानी वच्चे हुवा चताएं
मानस नितांत एकांत नो अनुभव करें
बहुत सिद्धु साधु द्रश्टान्त आपू ना
कोप्रु नाल्यर जरे पाकी जाएन
जरे होई नाल्यर ने अंदर
मन छुटु बात
एकांत नो अनुभव करें
बहुत सिद्धु साधु द्रश्टान्त आपू ना
कोप्रु नाल्यर जरे पाकी जाएन
जरे होई नाल्यर ने अंदर
बन छुटु बात
रहे अंदर पन अलाव तो छुटु है
बराबर पाकेलु होई जे
तो सहच चाकु लगार सो तो आकु
निकली जासे, काचु होई जे
तो थोडूप तो चौतेलु रहेशे जे
परिपुरन तमें नहीं काड़ी सको
एम करता करता बिलुकुल पाकी जाए
बराबर पाकेलु होई जे
तो सहच चाकु लगार सो तो आकु
निकली जासे, काचु होई जे
तो थोडूप तो चैटिलु रहेशे जे
परिपुरन तमें नहीं काड़ी सको
एम करता करता बिलुकुल पाकी जासे
रामायन मा जे नाम नाम नो प्रभाव बतायो छे
तामाटे एना ऊपर वदारे कहे
बिजु कुछ सू करवानु
हरी नाम जगो, परमात्मा नाम नो
स्मर्ण निक्क करिये
कोई पन दशा मा, कोई पन स्थिती
अने मारो आग्ड़ाना,
ये नाम महिमा खुब गायो छे
हरी नाम नाम नो
प्रभाव बतायी चे
तामाटे एना ऊपर वदारे कहे
बिजु कुछ सू करवानु
हरी नाम जगो, परमात्मा नाम नो
स्मर्ण निक्क करिये
कोई पन दशा मा, कोई पन स्थिती
निर्गुण ने सगुण रूपनु
तुलसी जी कहे,
बनने नो स्विकार करता,
गो स्वामी जी एपरति पादन करियो पन,
सादको ए अपेख्षा राखी के,
नही तमारो नीज मत आपो,
सगुण ने निर्गुण मा स्रेष्ट शु
सगुण ने निर्गुण,
कुई तक्रार न करे,
इतली सुचना आपी,
बनने हरी के रूप,
हरी नाम नी महत्ता गाई,
अने हवे गो स्वामी जी,
शर्णागती न गाटु पर थी,
भगवत कथानो आरंब करे,
अने पहलो परसंग शरु थाएजे,
आ चार गाट वालु जी,
सरोवर चे राम चरित मानस,
अने परतम गाट,
करवात गो स्वामी जी,
पताना मनने समझावा माते,
सुन्दर शब्दो तिया तथानो आरंब करे,
एनी पासे रहे 20 वरस ती एनी साथे ना सबन चरि
एस स्तरी साथी बाजारु महिला सथरी
20 वरस ना सबन पचि एव्यक्ती नु लगन थयवु
एपरणी ने घरे आयो एनी पतनी घरे आवी
एनी मांग मा संदूर परआयो एक सवहागन सतरी छरि
अन एक कलाक पचि पुरूष्य ने रदईरोग नो हूमलो थयव ।
पुरूष्य नु मोत थयो
तवझमीन, जागीर, जाईदाज कबने मलश जे परणी ना आवी एने मलशू
अनिया तो एने मलव जे परणी जाए जरने परणी जरने
मारों तमारो इश्वर साथे सबण चे
पर पेली बाजारू महिला जयव सबण चे
20 वरस्ट नो शु गणानो तो साइट साइट वरस्ट नो जे पोय पत्तो लग्ग
और दुव का सबण्द मिरा का सबण्द
परणी गया जे हरी नी साथे इन बदू मरजाय जिस ने शादी करली हरी के
मै एसे बरको प्यो बरूं जो आज जीए कल मरजाय
सन्तो एतला माते जगतमा कयरे विध्वा नथी थया करण के परमातमा नी साथे परणी गया
सन्तो अखनड सवभय्य पराप्त करएजे
एतला माते कबीर सहब कहेजे
शुन्य मरे अजपा मरे अनहद हुं मरजाय
राम सने ही नाम रे कह कबीर संजाय
कहरी नाम जपीय अनि सथे परणी ने सबन चोडी ने
पछि कोई परसण ने
आपनो सबन जरूर छे बाजारू महिला जोपने
सकिकत छे नाम
मन्दीर मा दरशन करतो इने माणस
आखो बन्द करिने
पन्दर पईस आवीस पईसा
पचचिस पईसा नाखिने
पचचीस पत्टी
खटव सठव
कर्धकव
करनव
खटव गडव
करणव
घरनु सच्चव
सचचव
गडव
गडव
झडव
गडव
खटव
खटव
खटव
जटव
खटव
जटव
जटव
गडव
जता
सर्यो
तरतव
नाए
तरतव
सन्तन
पलू पनी पिगय, दूबय, इवी चिठ्ती आपी, हमें तरि गये जरा
जोईयेगे तो करा, चिठ्ती मा लख्युवशु?
चिठ्ती खोले, तो अंदर राम लख्यो
भोर काई आवी खबर हतत, आपने मोटा अक्षर लखिन पड़े
यह तो नना अक्षर लखी
तुल्सिदात जी ना अक्षर करता, आपना अक्षर सरस थयय
तुल्सि कहे छोड़ो ये बाब
निकल गये ना, बोले नहीं बाबा, भेद बताओ
बोले खोटू नहीं लागे न, कहे नहीं
बोले तमें पहली वखत तरिया
और बीजी वखत तनाया
एनु कारण पहली वखत जे राम थू
ये तुल्सि नु राम थू
और बीजी वखत जे राम थू
ये चोर नु राम थू, अटलो फरक
वात ये नहीं होई
अधिकार संपन्न थाए
प्यारे ये वात द्रट बनी
बजार मा हुन तमें बोली
कोईने कही हटी जाओ
तो लोगो आपने गाल देशे
तू हटाओ वाड़ो
पर पुलिस्मैन कहें थो
हटी जाओ, हटी जाओ
कानकि उसको अधिकार है
शास्त्र तो वोही के वोही है, शब्द वोही के वोही है
पहुँ पंडित है, तो सारी
अलंकारिक वाशा में शब्द उगो ठून रजू करे
कोई हसे तो, बाकि वात तो
यहनी एजे, एसिवाई
तो कई कहवानु, पर अधिकार पची
जे बोलाय
ये लोखन नो खिलो जैम
लाकणा मां धर्बाय जतो है
सजजड थय जाय
बादमे नहीं ले जाय
इश्वर नी साथे सबन जोडाय
अने हरी नाम लेवाय तो
अनते थहस
बिजु कई करवानु रहतो
कथा शुका
अतलू भार पुर्व कमे कईये करवान
रहम नाम थो पसी तमे कदा
जम कहओ के अमे तो सांबलिये पण तमे
काटो निकले एपन काडी नाकवानु
जेना द्वारा काड़वा मा वे पण फयकि देवानु
आप काटो काड़वा ना साधनो छे
अनते तो केवल हरी नाम जब बचेसे
बद्धानी वच्चे हुवा चताएं
मानस नितांत एकांत नो अनुभव करें
बहुत सिद्धु साधु द्रश्टान्त आपू ना
कोप्रु नाल्यर जरे पाकी जाएन
जरे होई नाल्यर ने अंदर
मन छुटु बात
एकांत नो अनुभव करें
बहुत सिद्धु साधु द्रश्टान्त आपू ना
कोप्रु नाल्यर जरे पाकी जाएन
जरे होई नाल्यर ने अंदर
बन छुटु बात
रहे अंदर पन अलाव तो छुटु है
बराबर पाकेलु होई जे
तो सहच चाकु लगार सो तो आकु
निकली जासे, काचु होई जे
तो थोडूप तो चौतेलु रहेशे जे
परिपुरन तमें नहीं काड़ी सको
एम करता करता बिलुकुल पाकी जाए
बराबर पाकेलु होई जे
तो सहच चाकु लगार सो तो आकु
निकली जासे, काचु होई जे
तो थोडूप तो चैटिलु रहेशे जे
परिपुरन तमें नहीं काड़ी सको
एम करता करता बिलुकुल पाकी जासे
रामायन मा जे नाम नाम नो प्रभाव बतायो छे
तामाटे एना ऊपर वदारे कहे
बिजु कुछ सू करवानु
हरी नाम जगो, परमात्मा नाम नो
स्मर्ण निक्क करिये
कोई पन दशा मा, कोई पन स्थिती
अने मारो आग्ड़ाना,
ये नाम महिमा खुब गायो छे
हरी नाम नाम नो
प्रभाव बतायी चे
तामाटे एना ऊपर वदारे कहे
बिजु कुछ सू करवानु
हरी नाम जगो, परमात्मा नाम नो
स्मर्ण निक्क करिये
कोई पन दशा मा, कोई पन स्थिती
निर्गुण ने सगुण रूपनु
तुलसी जी कहे,
बनने नो स्विकार करता,
गो स्वामी जी एपरति पादन करियो पन,
सादको ए अपेख्षा राखी के,
नही तमारो नीज मत आपो,
सगुण ने निर्गुण मा स्रेष्ट शु
सगुण ने निर्गुण,
कुई तक्रार न करे,
इतली सुचना आपी,
बनने हरी के रूप,
हरी नाम नी महत्ता गाई,
अने हवे गो स्वामी जी,
शर्णागती न गाटु पर थी,
भगवत कथानो आरंब करे,
अने पहलो परसंग शरु थाएजे,
आ चार गाट वालु जी,
सरोवर चे राम चरित मानस,
अने परतम गाट,
करवात गो स्वामी जी,
पताना मनने समझावा माते,
सुन्दर शब्दो तिया तथानो आरंब करे,
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