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Devesh Kundan
Mehandipur Balaji Ki Katha

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जय श्री राव!
प्रिये भवतों!
श्री हनुमान जी महराज कल युग में भी प्रकत देव हैं
और अवधारना है कि ये चिरन जीवियों में सबसे प्रमुक हैं
समुष्ट बाधाओं का शमन दमन करने वाले हैं
श्री हनुमान जी को कुछ अस्थान पर श्री
बाला जी के नाम से भी जाना जाता है
और इनके कई तीर्थ अस्थल संपुर्ण भारत में विद्दमान हैं
उनहीं प्रमुक अस्थलों में से एक है
श्री महिंदीपूर बाला जी का मंदिर
यह मंदिर राजस्थान राज के टउसा जीले में अस्थापित है
जय जय श्रीराम
हम मेहिंदीपूर के बाला जी की कथा सुनाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
मेहिंदीपूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
हम कथा सुनाते हैं
हम मेहिंदीपूर के बाला जी की कथा सुनाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
मेहिंदीपूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
हम कथा सुनाते हैं
ये कथा है बड़ी बहार
सब सुनो लगा के ध्यार
इस कथा की है प्रेजार
मिले मुम्मा का वर्दार
जिस अस्थान पर आज श्री बाला जी का मंदिर
इस्थित है वहाँ पहले घनखोर जंगल था
और हिंसक जीवों सहित चोर डाकूँ का आस्थरे अस्थल भी था
लेकिन इन सब के बावजूद इसका प्राकर्तिक सौंदरी भी अक्शुनल था
यहाँ का वातावरन किसी का भी मन मोह लेने में सक्षम था
पहले आस पास मेहन्दिपूर के था केवल वन
हिंसक जीवों का उसमें खोया रहता था मन
खोया रहता था मन
चारों तरप दिखाई देती थी बस हर्याली
धीरे धीरे सदा हवा पहती थी मतवाली
लगता था सावन की इसमें है पहरेदारी
कुहु कुहु कोयलिया गीत सुनाती थी प्यारी
गीत सुनाती थी प्यारी
लेकिन उसके आसपास के गाऊं में हर घर
चोर, डाकूं, बदमासों का रहता बड़ा ही डर
इसलिए सब निस दिन भैसे समय बिताते हैं
हम कता सुनाते हैं
मेहन्दी पूर्धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
हम कता सुनाते हैं
ये कता है बड़ी बहार सब सुनो लगा के ध्यार
जहां आज बाबा का मंदिर है वही पास के गाऊं में पंडित जी रहते थे
उन्होंने सप्र में बाला जी के साक्षा दर्शन किये
लेकिन पंडित जी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया
उन्हें लगा कि वो भगवत भक्ती में रमे रहते हैं
एक रोज बाबा जी को एक सपना आया है
सपने में बाला जी ने निजरूप दिखाया है
बाला जी ने रूप दिखाया है
उनको नहीं ता कुछ भी होश
उसी आवस्था में बड़ चले वो आगे होके बिहोश
नहीं पता था उनको की वो कहा को जा रहे है
ये भी नहीं पता था कहा से अभी आ रहे है
बस लीला एक बाबा जी ने देखी है नियारी
जोती हजारों सम्मुक बड़ती आ रही है प्यारी
हम कथा सुनाते हैं
प्यारी हम का प्यारी जोती है नियारी जोती है नियारी
जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है
नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी
जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती
हम नहीं प्रभुजी का दर्बाई
नहीं प्रभुजी का दर्बाई
पाला जी प्रेत राज मंदिर उनको भव्य दिखाते हैं
उन्हें भव्य दिखाते हैं
महिंदी पूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
ब्राम्वन देवता के कानों में एक ही शब्द बार-बार घुञ्ज रहा था
शब्द एक ही कानों में प्यारा बेटा भार सम्हालो अब पूजा का तुम हमारा
पूजा का तुम हमारा पूजा का तुम हमारा
मैं कल युग में लीलाओं का करूँग अतिवितार
जिसको आगे चलकर जानेगा सारा संसाद
जानेगा सारा संसाद
ये निज़ाना जानेगा सारा संसाद
ये कता है बड़ी वहाई
सब सुनो लगा के ध्याद इस कता की है ब्रेचाद मिले मुमा का वर्दाद
अगले दिन ब्रामन देवता जब मंदिर गए तो
उन्हें और दिनों की आपेक्षव पर देखे
और दिनों की अपेक्षव कुछ अलग ही आभाश हुआ उन्हें
ऐसा लगा मानो सुरिश्टी का साक्षात कार हो रहा
मंदिर में स्वतही घड़ियाल नगाडे बजने लग गए
मंदिर की छटा अत्यंत मनमोहक हो गई ऐसा लग रहा था
मानो साक्षात बाला जी का प्राकटि हो रहा है
दूसरे दिन बाबा जंगल में गए है मंदिर पास
उन्हें वहाँ पर और दिनों से हुआ अलग एहसास
हुआ अलग एहसास
बात बताई
लोगों को सब कुछ समझा करके सब कुछ समझा करके
सुनकर स्री बाला जी की जैकार लगाते हैं सभी जैकार लगाते हैं
मेहन्दी पूर्धाम बना कैसे ये बात बताते हैं हम कथा सुनाते हैं
ये कता है बड़ी बहाँ
सब सुनो लगा के ध्याँ इस कता की है प्रैचाँ मिल मुम्मा का वर्दाँ
प्रैचाँ मिल मुम्मा का वरदाँ
बाला जी का जहां हुआ का मूर्थी रूप अवतार
आके करने लगे लोग वहाँ पूजा विविद प्रकार
कुछ लोगों ने सोचा की ये कला है कोई महाम
तो फिर बाला जी वहाँ से हो गए अंतर ध्याँ
फिर भक्तों ने छमा प्रार्थदा की उन से जाकर
तब बाला जी मूर्थी रूप में प्रकटे फिर आकर
बगटे फिर आकर
दिस्तिय देख के भक्त सभी हरषित हो जाते हैं
हरषित हो जाते हैं महिंदी पूरधाम बना कैसे ये बात बताते हैं
ये कता है बड़ी वहाँ
सब सुनो लका के ध्याँ इस कता की है पहचार मिले मुहमा का वर्दार
जिस अस्थान पर बाला जी की प्रतिमा अस्थापित है उस
अस्थल पर श्रीबाला जी के हरदार पर प्रकटे फिर जाते हैं
अस्थाल पर श्रीबाला जी के हरदे से एक जलधारा सतक
बहती रहती है जिसका रहस आज तक कोई नहीं जान पाया
बाला जी के चर्णों में है कुंड एक प्यारा
हुदे से हर दम बहती रहती उनके जलधारा
बहती रहती जलधारा
प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला जी के हरदे
से एक जलधारा पर श्रीबाला जी के हरदे से एक जलधारा
प्रकटे फिर जाते हैं
अस्थाल पर श्रीबाला जी के हरदे
से एक जलधारा
प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला
जी के हरदे से एक
जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला जी के
हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला
जी के हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल �
प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला जी के
हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल
पर श्रीबाला जी के हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल
पर श्रीबाला जी के हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल �
जब भगवान की पूजा वहाँ पर होने लगी और भक्तों का आना शुरू हो गया
तो उस समय के राजा ने दुरभावना से प्रेरित
हो प्रतिमा के नीचे खुदाई शुरू करवा दी
लेकिन वो प्रतिमा के छोर तक न पहुँच पाया
फिर उससे अपने गल्तियों का एहसास हुआ
और उसने भगवान से छमा के आच्छना किये
राजा ने जाकर के वहाँ पर खुद आया चहोर
किन्तू मूर्ती का पाया न कहीं भी कोई छोर
हार मान कर राजा ने है छमा दान मागा
अपना
अहंकार प्रभु के चर्णों में उसने त्यागा
देखा जब बाला जी ने राजा का पश्चाता फिर
तीनों मूर्तियां प्रगट हो गई है अपने आँग
राजा बाला जी के चर्णों में घिर जाते हैं
बाबा जी को वहाँ का सेवक खास बनाते हैं
फिर भख्र लोग उस जगह पे निसदिन कता सनाते हैं
पावन कता सनाते हैं
मेहन्दी पूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं हम कता सनाते हैं
मुख्य पुजारी मैं उस प्राम्मन देवगा की बात कर रहा हूँ
जिन्होंने बाला जी की पहली पूजा की थे उनके देह त्याग का समय आ गया
उन्होंने स्री बाला जी से प्रार्टना की और अपने शरीर छोडने से पुरुव
बाला जी से इस अस्थल पर अपने ही वन्षजों को पूजा का अध्यार माँगा
जिसे बाला जी ने सुईकार कर लिया
तब से आज तक उनके वन्षज ही बाला जी के मुख्य पुजारी होते हैं
स्री गुसाई जी ने बाला जी से आज्या मांगी
फिर समाधी लेकर अपने देह वहीं पर त्यागी
अपने देह वहीं पर त्यागी
बाला जी ने उनकी इक्षाओं को सुईकारा
उनके वन्षज को पूजा का भार दिया सारा
पूजा का भार दिया सारा
एक हजार वर्स पुर्व वहां प्रकटे थे भगवान
रुत्र के ग्यारभे अवतार जो हैं ग्यान की खान
कहते हैं जो भी बाला जी के दर पे जाता है
खाली जोली भर जाती मन चाहा फल पाता है
बाला जी भक्तों के सारे तुक्खड मिटाते है
वो कश्ट मिटाते है नहिंदी पूर्धाम बना
कहते हम ये बतलाते हैं हम कथा सुनाते हैं
ये कथा है बड़ी महाद सब सुनो लगा के ध्यार
इस कथा की है पैचार मिले मुमा का वर्दार
स्री बजरंग बली को रुद्र का घ्यारावा अवतार माना गया है उन्हें
भगवान शिव का ही प्रतिरूप माना जाता है जो माता अंजना के प्यारे
हैं उनकी क्रिपा से ये विरान धर्ति भी स्वर्ग समान हो गए नहीं
माता श्री अंजमी के जो हैं आँखों के तारे
पावन पुत्र सिया राम जी के हैं अती प्यारे
राम जी के हैं अती प्यारे वही भीर बजरंग बली है कलियुग में आए
राजस्थान के दोसा में बाला जी कहलाए
हनुमान के बाल रूप का यहाँ पे होता ध्यान
संत्व,
सिद्ध,
सुर,
नर,
मुनी सब करते हैं नित,
गुण,
गान
पाप, ताप, संताप सभी बाला जी हरते हैं
बीच, भवर में नयिया जिसकी पारी करते हैं
नयिया पारी करते हैं
बाला जी भगतों के बिगडे काम बनाते हैं
सब के काम बनाते हैं
मेहन्दी पूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
हम कता सुनाते हैं
ये कता है बड़ी बहार सब सुनो लगा के ध्यार
इस कता की है प्रेचार मिले मुहमा का वर्दार
प्रेतराज सरकार के दर्शन करने से ही मनुष्य अपने जीवन
में अनेक परकार की दुशित सक्तियों से मुझ्तों हो जाता
है नाकारात्मक शक्तियां उसके पास भी नहीं फटकती है
भेरो बाबा प्रेतराज बाला जी के धर्शन करके पावन हो जाते हैं तन,
मन और जीवन
तन, मन और जीवन
बहुत प्रेत बाला के नाम से थर थर करते हैं परोग,
दोस सभी नाम से इनके ही तो डरते हैं
नाम से इनके
डरते हैं
बाला जी का नाम जो भाव सनित ही गाता है
जनम मरण की बंदिशों से छुटकारा पाता है छुटकारा पाता है
देव सुकुंदन सदानन्द बाला को जुकाता शीश
कृपा निरंतर बनी रहे ये मांग रहे आशीश
महन्दीपूर बाले को नित भक्ती से ध्याते हैं उन्हें सीस नवाते हैं
महन्दीपूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं हम कथा सुनाते हैं
ये कता है बड़ी
वाहा सब सुनो लका के ध्यात इस कता की है
ब्रेचार मिले मुहमा का वर्दार
प्रिये भवतों!
श्री हनुमान जी महराज कल युग में भी प्रकत देव हैं
और अवधारना है कि ये चिरन जीवियों में सबसे प्रमुक हैं
समुष्ट बाधाओं का शमन दमन करने वाले हैं
श्री हनुमान जी को कुछ अस्थान पर श्री
बाला जी के नाम से भी जाना जाता है
और इनके कई तीर्थ अस्थल संपुर्ण भारत में विद्दमान हैं
उनहीं प्रमुक अस्थलों में से एक है
श्री महिंदीपूर बाला जी का मंदिर
यह मंदिर राजस्थान राज के टउसा जीले में अस्थापित है
जय जय श्रीराम
हम मेहिंदीपूर के बाला जी की कथा सुनाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
मेहिंदीपूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
हम कथा सुनाते हैं
हम मेहिंदीपूर के बाला जी की कथा सुनाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
मेहिंदीपूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
हम कथा सुनाते हैं
ये कथा है बड़ी बहार
सब सुनो लगा के ध्यार
इस कथा की है प्रेजार
मिले मुम्मा का वर्दार
जिस अस्थान पर आज श्री बाला जी का मंदिर
इस्थित है वहाँ पहले घनखोर जंगल था
और हिंसक जीवों सहित चोर डाकूँ का आस्थरे अस्थल भी था
लेकिन इन सब के बावजूद इसका प्राकर्तिक सौंदरी भी अक्शुनल था
यहाँ का वातावरन किसी का भी मन मोह लेने में सक्षम था
पहले आस पास मेहन्दिपूर के था केवल वन
हिंसक जीवों का उसमें खोया रहता था मन
खोया रहता था मन
चारों तरप दिखाई देती थी बस हर्याली
धीरे धीरे सदा हवा पहती थी मतवाली
लगता था सावन की इसमें है पहरेदारी
कुहु कुहु कोयलिया गीत सुनाती थी प्यारी
गीत सुनाती थी प्यारी
लेकिन उसके आसपास के गाऊं में हर घर
चोर, डाकूं, बदमासों का रहता बड़ा ही डर
इसलिए सब निस दिन भैसे समय बिताते हैं
हम कता सुनाते हैं
मेहन्दी पूर्धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
हम कता सुनाते हैं
ये कता है बड़ी बहार सब सुनो लगा के ध्यार
जहां आज बाबा का मंदिर है वही पास के गाऊं में पंडित जी रहते थे
उन्होंने सप्र में बाला जी के साक्षा दर्शन किये
लेकिन पंडित जी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया
उन्हें लगा कि वो भगवत भक्ती में रमे रहते हैं
एक रोज बाबा जी को एक सपना आया है
सपने में बाला जी ने निजरूप दिखाया है
बाला जी ने रूप दिखाया है
उनको नहीं ता कुछ भी होश
उसी आवस्था में बड़ चले वो आगे होके बिहोश
नहीं पता था उनको की वो कहा को जा रहे है
ये भी नहीं पता था कहा से अभी आ रहे है
बस लीला एक बाबा जी ने देखी है नियारी
जोती हजारों सम्मुक बड़ती आ रही है प्यारी
हम कथा सुनाते हैं
प्यारी हम का प्यारी जोती है नियारी जोती है नियारी
जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है
नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी
जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती है नियारी जोती
हम नहीं प्रभुजी का दर्बाई
नहीं प्रभुजी का दर्बाई
पाला जी प्रेत राज मंदिर उनको भव्य दिखाते हैं
उन्हें भव्य दिखाते हैं
महिंदी पूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
ब्राम्वन देवता के कानों में एक ही शब्द बार-बार घुञ्ज रहा था
शब्द एक ही कानों में प्यारा बेटा भार सम्हालो अब पूजा का तुम हमारा
पूजा का तुम हमारा पूजा का तुम हमारा
मैं कल युग में लीलाओं का करूँग अतिवितार
जिसको आगे चलकर जानेगा सारा संसाद
जानेगा सारा संसाद
ये निज़ाना जानेगा सारा संसाद
ये कता है बड़ी वहाई
सब सुनो लगा के ध्याद इस कता की है ब्रेचाद मिले मुमा का वर्दाद
अगले दिन ब्रामन देवता जब मंदिर गए तो
उन्हें और दिनों की आपेक्षव पर देखे
और दिनों की अपेक्षव कुछ अलग ही आभाश हुआ उन्हें
ऐसा लगा मानो सुरिश्टी का साक्षात कार हो रहा
मंदिर में स्वतही घड़ियाल नगाडे बजने लग गए
मंदिर की छटा अत्यंत मनमोहक हो गई ऐसा लग रहा था
मानो साक्षात बाला जी का प्राकटि हो रहा है
दूसरे दिन बाबा जंगल में गए है मंदिर पास
उन्हें वहाँ पर और दिनों से हुआ अलग एहसास
हुआ अलग एहसास
बात बताई
लोगों को सब कुछ समझा करके सब कुछ समझा करके
सुनकर स्री बाला जी की जैकार लगाते हैं सभी जैकार लगाते हैं
मेहन्दी पूर्धाम बना कैसे ये बात बताते हैं हम कथा सुनाते हैं
ये कता है बड़ी बहाँ
सब सुनो लगा के ध्याँ इस कता की है प्रैचाँ मिल मुम्मा का वर्दाँ
प्रैचाँ मिल मुम्मा का वरदाँ
बाला जी का जहां हुआ का मूर्थी रूप अवतार
आके करने लगे लोग वहाँ पूजा विविद प्रकार
कुछ लोगों ने सोचा की ये कला है कोई महाम
तो फिर बाला जी वहाँ से हो गए अंतर ध्याँ
फिर भक्तों ने छमा प्रार्थदा की उन से जाकर
तब बाला जी मूर्थी रूप में प्रकटे फिर आकर
बगटे फिर आकर
दिस्तिय देख के भक्त सभी हरषित हो जाते हैं
हरषित हो जाते हैं महिंदी पूरधाम बना कैसे ये बात बताते हैं
ये कता है बड़ी वहाँ
सब सुनो लका के ध्याँ इस कता की है पहचार मिले मुहमा का वर्दार
जिस अस्थान पर बाला जी की प्रतिमा अस्थापित है उस
अस्थल पर श्रीबाला जी के हरदार पर प्रकटे फिर जाते हैं
अस्थाल पर श्रीबाला जी के हरदे से एक जलधारा सतक
बहती रहती है जिसका रहस आज तक कोई नहीं जान पाया
बाला जी के चर्णों में है कुंड एक प्यारा
हुदे से हर दम बहती रहती उनके जलधारा
बहती रहती जलधारा
प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला जी के हरदे
से एक जलधारा पर श्रीबाला जी के हरदे से एक जलधारा
प्रकटे फिर जाते हैं
अस्थाल पर श्रीबाला जी के हरदे
से एक जलधारा
प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला
जी के हरदे से एक
जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला जी के
हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला
जी के हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल �
प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल पर श्रीबाला जी के
हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल
पर श्रीबाला जी के हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल
पर श्रीबाला जी के हरदे से एक जलधारा प्रकटे फिर जाते हैं अस्थाल �
जब भगवान की पूजा वहाँ पर होने लगी और भक्तों का आना शुरू हो गया
तो उस समय के राजा ने दुरभावना से प्रेरित
हो प्रतिमा के नीचे खुदाई शुरू करवा दी
लेकिन वो प्रतिमा के छोर तक न पहुँच पाया
फिर उससे अपने गल्तियों का एहसास हुआ
और उसने भगवान से छमा के आच्छना किये
राजा ने जाकर के वहाँ पर खुद आया चहोर
किन्तू मूर्ती का पाया न कहीं भी कोई छोर
हार मान कर राजा ने है छमा दान मागा
अपना
अहंकार प्रभु के चर्णों में उसने त्यागा
देखा जब बाला जी ने राजा का पश्चाता फिर
तीनों मूर्तियां प्रगट हो गई है अपने आँग
राजा बाला जी के चर्णों में घिर जाते हैं
बाबा जी को वहाँ का सेवक खास बनाते हैं
फिर भख्र लोग उस जगह पे निसदिन कता सनाते हैं
पावन कता सनाते हैं
मेहन्दी पूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं हम कता सनाते हैं
मुख्य पुजारी मैं उस प्राम्मन देवगा की बात कर रहा हूँ
जिन्होंने बाला जी की पहली पूजा की थे उनके देह त्याग का समय आ गया
उन्होंने स्री बाला जी से प्रार्टना की और अपने शरीर छोडने से पुरुव
बाला जी से इस अस्थल पर अपने ही वन्षजों को पूजा का अध्यार माँगा
जिसे बाला जी ने सुईकार कर लिया
तब से आज तक उनके वन्षज ही बाला जी के मुख्य पुजारी होते हैं
स्री गुसाई जी ने बाला जी से आज्या मांगी
फिर समाधी लेकर अपने देह वहीं पर त्यागी
अपने देह वहीं पर त्यागी
बाला जी ने उनकी इक्षाओं को सुईकारा
उनके वन्षज को पूजा का भार दिया सारा
पूजा का भार दिया सारा
एक हजार वर्स पुर्व वहां प्रकटे थे भगवान
रुत्र के ग्यारभे अवतार जो हैं ग्यान की खान
कहते हैं जो भी बाला जी के दर पे जाता है
खाली जोली भर जाती मन चाहा फल पाता है
बाला जी भक्तों के सारे तुक्खड मिटाते है
वो कश्ट मिटाते है नहिंदी पूर्धाम बना
कहते हम ये बतलाते हैं हम कथा सुनाते हैं
ये कथा है बड़ी महाद सब सुनो लगा के ध्यार
इस कथा की है पैचार मिले मुमा का वर्दार
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भगवान शिव का ही प्रतिरूप माना जाता है जो माता अंजना के प्यारे
हैं उनकी क्रिपा से ये विरान धर्ति भी स्वर्ग समान हो गए नहीं
माता श्री अंजमी के जो हैं आँखों के तारे
पावन पुत्र सिया राम जी के हैं अती प्यारे
राम जी के हैं अती प्यारे वही भीर बजरंग बली है कलियुग में आए
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हनुमान के बाल रूप का यहाँ पे होता ध्यान
संत्व,
सिद्ध,
सुर,
नर,
मुनी सब करते हैं नित,
गुण,
गान
पाप, ताप, संताप सभी बाला जी हरते हैं
बीच, भवर में नयिया जिसकी पारी करते हैं
नयिया पारी करते हैं
बाला जी भगतों के बिगडे काम बनाते हैं
सब के काम बनाते हैं
मेहन्दी पूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं
हम कता सुनाते हैं
ये कता है बड़ी बहार सब सुनो लगा के ध्यार
इस कता की है प्रेचार मिले मुहमा का वर्दार
प्रेतराज सरकार के दर्शन करने से ही मनुष्य अपने जीवन
में अनेक परकार की दुशित सक्तियों से मुझ्तों हो जाता
है नाकारात्मक शक्तियां उसके पास भी नहीं फटकती है
भेरो बाबा प्रेतराज बाला जी के धर्शन करके पावन हो जाते हैं तन,
मन और जीवन
तन, मन और जीवन
बहुत प्रेत बाला के नाम से थर थर करते हैं परोग,
दोस सभी नाम से इनके ही तो डरते हैं
नाम से इनके
डरते हैं
बाला जी का नाम जो भाव सनित ही गाता है
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कृपा निरंतर बनी रहे ये मांग रहे आशीश
महन्दीपूर बाले को नित भक्ती से ध्याते हैं उन्हें सीस नवाते हैं
महन्दीपूर धाम बना कैसे हम ये बतलाते हैं हम कथा सुनाते हैं
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